नक्सलवाद का उदय
यह घटना 1967 के मई महीने में शुरू होती है जब CPI (M) के नेता चारु मजूमदार (नक्सलवाद के वैचारिक पिता), कानू सान्याल और जंगल संथल के नेतृत्व में पच्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के नक्सलबाड़ी गांव में किसानों ने जमींदारों पर हमला किया और सारे माल गोदाम लूट लिया और गांव पर कब्जा कर लिया।इसे 'किसान मुक्ति क्षेत्र' नाम दिया गया।जल्द ही ये आंदोलन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मदद भारत के अन्य जगहों पर भी फैला। इससे के साथ भारत में नक्सलवाद की शुरुआत हुई। CPI (ML) का गठन इस घटना के बाद CPI(M) ने चारु और उसके साथियों पर अनुशासनिक कार्यवाही की धमकी दी जिससे पार्टी से विमुख होकर CPI(ML)(भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी मार्क्सवाद लेनिनवाद) का गठन चारु मजूमदार के नेतृत्व में किया गया।इसका मुख्य उद्देश्य माओ के सिद्धांतों पर चल कर एक सशस्त्र विद्रोह करना था।चारु ने 1970 के दशक को मुक्ति का दशक घोषित किया और 1971 तक पूरे देश में लगभग 4000 लोगो को खूनी विद्रोह के लिए तैयार किया।इनका मुख्य निशाना पुलिस होती थी जिससे ये आसानी से हथियार लूट सके।1971 में चारु ने एक उग्र गिरोह की स्थापना की जिसे ' पीपुल्स...